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ताजमहल या तेजोमहालय : आँख होने पर भी दिखाई नहीं देता अक्ल के अंधो को, खुद देखिये ये सबूत!

सबसे पहले आपको आगरा के बारे में बता दें की ये शहर का नाम अंग्रिया ऋषि के नाम पर पडा था अंग्रिया ऋषि इसी इलाके में रहते थे और वो भगवान शिव के भक्त थे आज जहाँ पर ताजमहल है वहां पर हज़ारों साल पहले अंग्रिया ऋषि ने शिवमंदिर बनाया था जिसका नाम तेजोमहालय रखा था और ये नाम क्यों रखा था वो भी जानिये भगवान शिव के शिवलिंग पर पूर्णिमा की रात को या फिर उन रातों को जब चंद्र अच्छी रौशनी देती थी |

15वी सदी में जयपुर के राजा जय सिंह इस मंदिर में आये थे और उन्होंने इस मंदिर को भव्य बनाया और आज का जो ताजमहल है उसे जयसिंह ने ही बनवाया था इसका प्रमाण हम आपको देंगे आपकी जानकारी के लिए बता दें की इतिहासकार आपको बताते है |

मुमताज बेगम मर गयी तो उसकी याद में शाहजहां ने ताजमहल बनवाया पर ताजमहल को बनाने में तो सालों लगे तबतक क्या मुमताज की लाश हवा में थी असल में मुमताज महल की मौत आगरा या दिल्ली में हुई ही नहीं थी बल्कि उसकी मौत मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में हुई थी जहाँ आज भी बुरहानपुर किला मौजूद है जहाँ मुमताज महल रहा करती थी |

मौत के बाद उसे वहीं दफनाया गया था और आपको अब सबूत देते है की जब मुमताज महल जिन्दा थी तब भी ताजमहल था क्यूंकि असल में ताजमहल तो 15वी सदी का ही बना हुआ है जिसे राजा जयसिंह ने बनवाया था देखिये बुरहानपुर किले का वो कमरा जिसमे मुमताज महल की मौत हुई थी ये आज भी मौजूद है ये है वो कमरा जिसमे मुमताज महल अपने 14वे बच्चे को जन्म दे रही थी और उसी दौरान प्रसव पीड़ा से उसकी मौत हुई थी इसी कमरे में मुमताज महल मरी थी इस कमरे में रंगीन पत्थरों से कई चीजों को बनाया गया है था |

वो अपने मध्य प्रदेश के बुरहानपुर किले के कमरे में बनवाया था जहाँ वो रहती थी मुमताज मर गयी तो उसकी लाश को वहीँ दफ़न किया गया बाद में 2 साल बाद लाश को शाहजहां आगरा के तेजोमहालय ले आया मंदिर को उसने मकबरे की शक्ल दे दी और शिवलिंग तथा अन्य हिन्दू मूर्तियों को तोड़कर यहाँ वहां फेंक दिया 21 कमरों में भी बहुत सी मूर्तियां पड़ी है जो इस ईमारत के ग्राउंड फ्लोर पर है |

जय सिंह ने तेजोमहालय को बनाते हुए उसी अंग्रिया ऋषि के पैरों के चिन्ह मंदिर में बनवाये थे जिन्होंने यहाँ अपने हाथों से ओरिजिनल शिव लिंग स्थापित किया था मंदिर जर्जर स्तिथि में था तो जय सिंह ने उसे ठीकतब उसने हज़ारों की सख्या में मंदिर में यानि तेजोमहायल में हिन्दू देवी देवताओं, घोड़े, बैल इत्यादि की मूर्तियां लगवाई थी इन बंद कमरों में वही मूर्तियां है मंदिर को शाहजहां ने मकबरे का स्वरुप दिया और मूर्तियों को तोड़कर यहाँ वहां फेंका कुछ मूर्तियों को कमरों में बंद कर दिया |

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