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हाई कोर्ट ने मस्जिद को लेकर सुना दिया अबतक का सबसे कड़ा फरमान, ओवैसी, मुस्लिम संगठन के उड़े होश

लखनऊ : वैसे तो आज कल सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों पर लोगों को ज़रा संदेह होने लगा है लेकिन इस बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मस्जिद को लेकर कड़ा फैसला सुना दिया है जिसे देख लोगों के हलक के नीचे बात नहीं उतर रही कि हमारे सेक्युलर देश में कोर्ट ऐसा फैसला भी सुना सकता है.

 

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मस्जिद गिराने का दिया आदेश !
अभी मिल रही बड़ी खबर के मुताबिक इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने परिसर की जमीन पर बनी मस्जिद पर बड़ा फैसला सुनाते हुए उसे अवैध घोषित कर दिया है. साथ ही हाईकोर्ट ने कठोर रवैया अपनाते हुए 3 महीने के अंदर मस्जिद को गिराने के निर्देश दे दिए हैं. कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि मस्जिद की प्रबंध समिति तय समय में जमीन का कब्जा हाईकोर्ट को वापस नहीं करती तो उसके एक महीने के भीतर महानिबंधक पुलिस बल की सहायता से ज़बरन जमीन को खाली करा लिया जाएगा

कड़ी सुरक्षाबल की हुई तैनाती
ऐसा फैसला सुनाने के बाद खुद हाईकोर्ट को सुरक्षा का डर सताने लगा है. जमीन पर अतिक्रमण कर बनी मस्जिद को अवैध घोषित करने का फैसला आने से पहले सुरक्षा चाक चौबंद की गई. अर्धसैनिक बल हाईकोर्ट की सुरक्षा में जगह-जगह मुस्तैदी से डटे रहे.

गौरतलब है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की जमीन पर अवैध अतिक्रमण कर मस्जिद बनाई गई है. जिसे हटाने के लिए पिछले साल एक जनहित याचिका दाखिल की गई थी. कड़ा रुख अपनाते हुए हाईकोर्ट ने कहा की मस्जिद अवैध रूप से हाईकोर्ट की जमीन पर बनाई गई है. तीन महीने के अंदर सुन्नी वक्फ बोर्ड और मस्जिद की प्रबंध समिति यहां से मस्जिद हटाए.

 

कोर्ट ने थोड़ा मरहम लगाया
लेकिन ऐसा कड़ा फैसला सिर्फ अपने परिसर में बनी अवैध मस्जिद के खिलाफ लेने के बाद कोर्ट ने थोड़ा मरहम भी लगाया. कोर्ट ने कहा मस्जिद का दूसरी जगह निर्माण किया जा सकता है. कोर्ट ने मस्जिद प्रबंधन से कहा कि यदि वह चाहें तो चार हफ्ते में मस्जिद के लिए वैकल्पिक जमीन की मांग के संबंध में जिला प्रशासन या राज्य सरकार को को अर्जी दे सकता है जिस पर राज्य सरकार या जिला प्रशासन नियमानुसार आठ सप्ताह में निर्णय लें.

इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस डीबी भोसले और जस्टिस एमके गुप्ता की डबल बेंच ने करी. डबल बेंच ने हाईकोर्ट ने अपने फैसले के दौरान ये भी साफ किया कि भविष्य में हाईकोर्ट की जमीन पर पूजा या नमाज पढ़ने की अनुमति कतई नही दी जाएगी. हाईकोर्ट की जमीन पर हाईकोर्ट से संबंधित काम होंगे.

आखिरकार कोर्ट परिसर में मस्जिद कैसे पहुंची?
लेकिन सबसे बड़ी सोचने वाली बात यह है कि आखिरकार किसके अंदर इतनी दयालु भाव जागा कि हाईकोर्ट के परिसर के अंदर तक मस्जिद बनाने की इज़ाज़त दे डाली. लोग भी हैरान हैं कि आखिरकार कोर्ट के परिसर के अंदर तक मस्जिद पहुंची तो पहुंची कैसे? खैर फिलहाल 3 महीने के अंदर सुन्नी वक्फ बोर्ड और मस्जिद की प्रबंध समिति यहां से मस्जिद हटाए जाने के आदेश दे दिए गए हैं.

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