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नेवी चीफ ने रक्षामंत्री सीतारमण को शहीदों को लेकर चिट्ठी में ये लिखा, पढ़ें पूरी खबर

New Delhi: ना मरने का डर…ना दुश्मन का खौफ, फिकर थी तो सिर्फ देश की। घर से मीलों दूर अपने परिवार को अकेला छोड़ जो देश के लिए शहीद हुआ, आज उसी शहीद के बच्चों को देश में सुख-सुविधाओं से दूर रखा जा रहा है।

नौसेना प्रमुख सुनील लांबा ने देश के लिए कुर्बान उन जवानों को याद करते हुए रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर  गुजारिश की है। सुनील लांबा का कहना है कि देश के लिए जान गंवाने वाले जवानों के बच्चों को मिलने वाली शिक्षा प्रतिपूर्ति को कम करने का जो फैसला किया गया है, उसे वापस लिया जाए। ऐसा करना सरासर गलत है।

उबलती गर्मी हो या कड़कड़ाती ठंड हो। बारिश हो या तूफान देश की रक्षा के लिए हमेशा हमने अपने सामने इन जवानों को खड़ा पाया। यहां तक की इन्होंने अपनी जान तक दे दी है। इन्होंने ही लाखों करोड़ों जिंदगियों को बचा रखा है। आज जवानों की वजह से लोग अपने बच्चों के साथ चैन की नींद सो रहे हैं।  ऐसे में सरकार उनके बच्चों की पढ़ाई के लिए मिलने वाला फंड कम करने जा रही है। सरकार को उनके बच्चों को पढ़ाई के लिए मिलने वाला फंड कम नहीं किया जाना चाहिए।

सुनील लांबा ने आगे लिखा कि अगर सरकार मेरे इस गुजारिश को मान लेती है तब ही पता लगेगा कि सरकार देश के लिए बलिदान देने वालों को याद रखती है, और उनका आदर भी करती है।दरअसल, पहले जान गंवाने वाले, लापता हो जाने वाले या दिव्यांग सैनिकों के बच्चों की ट्यूशन फीस से लेकर हॉस्टल फीस, किताबों का खर्च, स्कूल और घर के कपड़ों का पूरा खर्च सरकार उठाती थी, लेकिन अब 1 जुलाई से इसको 10 हजार रुपए तक सीमित कर दिया गया है। ऐसे में सरकार बच्चों के इस हक को छीन रही है।

एक अनुमान के मुताबिक, सशस्त्र बल के जवानों के लगभग 3,400 बच्चे इससे प्रभावित हुए हैं। इस व्यवस्था को भारत सरकार ने 1971 की लड़ाई जीतने के बाद शुरू किया था, सुनील लांबा के पत्र के बाद रक्षा मंत्रालय ने अपने फैसले पर फिर से विचार करना शुरू कर दिया है।

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