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मोदी के कमाल से हुआ जबरदस्त चमत्कार, 6 देशों में ब्रह्मोस मिसाइलें देख अमेरिका और चीन भी हैरान

नई दिल्ली : कांग्रेस सरकार के वक़्त जहां एक ओर भारत अपनी रक्षा जरूरतों के लिए अन्य विकसित देशों पर निर्भर रहता था, रक्षा सौदों में अरबों के घोटालों होते थे सो अलग. वहीँ प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी ने अपने कमाल से देश की दिशा और दशा दोनों ही बदल दी हैं. अभी-अभी आयी इस मीडिया रिपोर्ट को पढ़ने के बाद आप भी पीएम मोदी को सलाम करेंगे.

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दुनियाभर के देश खरीद रहे ब्रह्मोस मिसाइलें

पीएम मोदी ने भारत में “मेक इन इंडिया” के तहत मिसाइलें और वेपन सिस्टम तैयार करवाने शुरू कर दिए ताकि रक्षा सौदों में होने वाली धांधली और दलाली पूरी तरह से ख़त्म हो जाए. अब ना केवल अपनी जरूरतों के लिए भारत खुद हथियार बना रहा है बल्कि दुनिया भर के तमाम देशों को भारत में बने मिसाइल और अन्य वेपन सिस्टम बेच भी रहा है.

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रूस, वियतनाम, इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका, चिली और ब्राजील भी भारत की ब्रह्मोस मिसाइलों को खरीद रहे हैं. खबर है कि भारत में बनी सुपर सोनिक इंटर कॉन्टिनेंटल ब्रह्मोस मिसाइल दुनियाभर के देशों को इतनी पसंद आ रही है कि ब्रह्मोस की बिक्री अगले पांच साल में दोगुनी हो सकती है. ब्रह्मोस अंतरिक्ष परियोजना के सीईओ सुधीर कुमार मिश्रा ने यह बात कही.

5 साल में दोगुनी होगी ब्रह्मोस मिसाइल की बिक्री

उन्होंने कहा कि निर्यात सिरे चढ़ा तो ब्रह्मोस मिसाइल की बिक्री पांच साल में दोगुनी हो सकती है. इंडो-रशियन संयुक्त उपक्रम की शुरुआत 1998 में हुई थी. पिछले बीस साल में सात अरब डॉलर के घरेलू आर्डर मिल चुके हैं, लेकिन अभी सबसे अहम जरूरत निर्यात सिरे चढ़ने की है.

 

डेफटेक-2017 (भारतीय उद्योग व रक्षा मंत्रालय के संघ) में सीईओ का कहना था कि रूस व् भारत के संयुक्त मिशन के जरिये सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों का निर्माण किया जाता है. इन्हें पनडुब्बी, जहाज, विमान या फिर जमीन से दागा जा सकता है. भारत की तीनों सेनाएं थल सेना, वायु सेना और जल सेना इन मिसाइलों का इस्तेमाल कर रही हैं.

अरबों रुपयों की हो रही कमाई

अंतरराष्ट्रीय समझौतों के चलते 2016 से पहले ब्रह्मोस का निर्यात नहीं किया जा सकता था, लेकिन पीएम मोदी की कोशिशों के बाद भारत एमसीटीआर (मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजाइम) में शामिल हो चुका है. जिससे भारत को इनका निर्यात करने का अधिकार मिल चुका है.

सुधीर कुमार मिश्रा का कहना है कि बीस साल का सफर आसान नहीं था. कई बार पैसों की दिक्कतें आयीं, तो कई बार अन्य तरह की चुनौतियां भी सामने आयीं. उन्होंने बताया कि कंपनी की स्थापना के 14 साल बाद जा कर प्रॉफिट होना शुरू हुआ. आज ब्रह्मोस मिसाइलों से सात करोड़ डॉलर से ज्यादा का प्रॉफिट हो रहा है.

 

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