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ये था पहला देश जिसने युद्ध में मिसाइलों का इस्तेमाल करने की सोची थी, कहते थे मिसाइल फैक्ट्री

आज दुनिया मिसाइलों और रॉकेटों के ज़रिए जंग लड़ती है। हर देश तरह-तरह की मिसाइलें अपने हथियारों के ज़खीरे में रखता है ताकि दुश्मन को दूर से ही नेस्तनाबूद किया जा सके। भारत के पास भी, पास और दूर तक मार करने वाली कई तरह की मिसाइलें हैं।
इनमें से कुछ मिसाइलों को अंतरिक्ष में सैटेलाइट लॉन्च करने वाले रॉकेट में तब्दील कर लिया गया है। पर, क्या आपको पता है कि मिसाइल बनाने का काम किस देश ने सबसे पहले शुरू किया था? आप इस सवाल का जवाब सुनेंगे तो हैरान रह जाएंगे। जर्मनी वो पहला देश था जिसने युद्ध में मिसाइलों का इस्तेमाल करने की सोची थी।

ये बात और है कि आज रूस और अमरीका इस रेस में बहुत आगे निकल गए हैं। मगर मिसाइलों की इस होड़ की शुरुआत जर्मनी ने ही की थी। बाद में वहीं के वैज्ञानिकों ने रूस और अमरीका में मिसाइलों के निर्माण में अहम रोल निभाया। ये बात और है कि जर्मनी ख़ुद कभी मिसाइलों का इस्तेमाल नहीं कर सका।

ये बात दूसरे विश्व युद्ध के दौरान की है। जर्मनी का एक गांव मिसाइल फैक्ट्री के तौर पर विकसित किया गया था। इस गांव का नाम है, पेनमुंडे। ये गांव जर्मनी के यूसडम द्वीप में पेन नदी के मुहाने पर स्थित है। पेन नदी, यहां पर आकर बाल्टिक सागर में गिरती है। यूसडम द्वीप यूं तो अपने शानदार बीच और मछली से बने सैंडविच के लिए मशहूर है। ऐतिहासिक काल में भी यहां के द्वीप प्रशिया की राजशाही के बीच बेहद लोकप्रिय थे। बाद में पूर्वी जर्मनी के लोग भी यहां छुट्टियां बिताने आया करते थे।

मगर 1936 से 1945 के बीच इस द्वीप के पेनमुंडे गांव को नाज़ी सरकार ने अपने बेहद ख़ुफ़िया मिशन का अड्डा बनाया था। 1935 में जर्मन इंजीनियर वर्नहर वॉन ब्रॉन ने पेनमुंडे गांव को अपने मिसाइल के कारखाने के लिए चुना था। इसके आसपास का चार सौ किलोमीटर का इलाक़ा सुनसान था।

ब्रॉन ने सोचा कि ये जगह उनके रॉकेट के परीक्षण के लिए बिल्कुल सही रहेगी। सरकार से इजाज़त मिलने के बाद यहां मिसाइल का कारखाना और टेस्टिंग रेंज स्थापित करने का काम बड़ी तेज़ी से हुआ। क़रीब 12 हज़ार लोगों ने यहां दिन-रात काम करके दुनिया की पहली क्रूज़ मिसाइल बनाने की फ़ैक्ट्री और टेस्टिंग रेंज को तैयार किया।

ये फ़ैक्ट्री क़रीब 25 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैली थी। पेनमुंडे में होने वाला रिसर्च और मिसाइल टेस्ट, दुनिया के सबसे बड़े युद्ध के लिए ही अहम नहीं थे, बल्कि आने वाले वक़्त के लिए भी बेहद अहम साबित हुए। इस गांव में ही रॉकेट तकनीक की बुनियाद रखी गई जिसकी मदद से आगे चलकर इंसान ने अंतरिक्ष का सफ़र शुरू किया।

 

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