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ईरान ने किया विश्वासघात तो इजराइल ने दिया भारत का साथ, एक फैसले से उड़ाए अरब देशों के होश

नई दिल्ली : पीएम मोदी की कूटनीति के चलते भारत के साथ विश्वासघात करने वाले ईरान को बड़ा झटका लगा है. दरअसल ईरान ने फरजाद बी गैस फील्‍ड का काम भारत की जगह रूसी कंपनी को दे दिया. फरजाद बी गैस फील्‍ड को खोजने में भारत सरकार की कंपनी ने ईरान की मदद की थी. शर्त ये थी कि बदले में ईरान वहां से गैस निकालने का काम भारत को देगा लेकिन गैस फील्ड की खोज होने के बाद ईरान अपने वादे से साफ़ मुकर गया, जिसका जवाब मोदी की कूटनीति से ईरान को मिला है.

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ईरान के खिलाफ इजराइल आया भारत के साथ
ईरान को करारा झटका देते हुए इजराइल ने पीएम मोदी व् भारत का ऐसे वक़्त फिर साथ दिया है और तेल और गैस की सरकारी कंपनी ओएनजीसी विदेश लिमिटेड को अपने यहाँ तेल व् गैस फील्ड का लाइसेंस दे दिया है.

ईरान के भारत के साथ विश्वासघात के बाद ओएनजीसी ने तेल व् गैस निकालने के लिए अन्य देशों की ओर रुख किया. इजराइल ने मौके का लाभ उठाया और ओएनजीसी को फ़टाफ़ट अपने यहाँ तेल व् गैस निकालने का लाइसेंस दे दिया. इजरायल के ऊर्जा मंत्री ने 11 दिसंबर को एक ब्लॉक भारतीय तेल और गैस कंपनियों को आवंटित कर दिया है.

ईरान को सख्त कूटनीतिक सन्देश
सबसे ख़ास बात ये भी है कि इजरायल ने विदेशी कंपनियों के लिए अपनी ऑइल और गैस फील्ड्स की नीलामी बंद कर रखी थी, मगर भारत के लिए इजराइल ने अपने द्वार खोल दिए. पिछले चार सालों में इजरायल के ऑइल और गैस फील्ड की यह पहली नीलामी है. ओएनजीसी विदेश के एमडी एनके वर्मा ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि वह कुछ प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद ब्लॉक में तेल और गैस के लिए खुदाई शुरू करेंगे.

इजरायल की ओर से मिला एक गैस ब्लॉक पीएम मोदी की कूटनीति का नतीजा है. हाल ही में पीएम मोदी इजराइल के दौरे पर गए थे, जिसके बाद इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू 14 जनवरी को भारत के तीन दिवसीय दौरे पर आने वाले हैं. दोनों देश सिक्यॉरिटी और डिफेंस मामले पर द्विपक्षीय संबंध मजबूत करने की ओर बढ़ रहे हैं.

इसके उलट ईरान व् खाड़ी देश नहीं चाहते कि इजराइल और भारत की दोस्ती हो. मगर भारत के साथ विश्वासघात करके ईरान ने खुद ही अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली है. अब ईरान व् कोई अन्य अरब देश शिकायत भी नहीं कर सकता कि भारत क्यों इजराइल में तेल निकालने का काम कर रहा है.

ज्यादा मुनाफे के लिए ईरान ने किया था विश्वासघात
2008 में भारत की ओएनजीसी विदेश लिमिटेड ने अपनी अत्याधुनिक तकनीक के इस्तमाल से ईरान की इस गैस फील्ड को खोजा था. चीन के बाद भारत ईरान से सबसे ज्यादा तेल आयात करता है, यानी ईरान को भारत से प्रतिवर्ष मोटी कमाई होती है. पिछले दिनों अपने परमाणु कार्यक्रम के कारण अमेरिका समेत कई देशों से आर्थिक प्रतिबन्ध झेल रहे ईरान से उस नाजुक वक़्त में भी भारत ने दगा नहीं किया और उससे तेल आयात करना जारी रखा था.

लेकिन जैसे ही अमेरिका ने ईरान पर से आर्थिक प्रतिबंध हटाया, वैसे ही ईरान के सुर बदल गए और उसने तेल और गैस की बेहतर कीमत के लिए आक्रामक रुख अपना लिया. भारत को उम्मीद थी कि ईरान भारत के प्रति उदार रुख अपनाएगा, क्योंकि मुसीबत के वक़्त में भारत ने ईरान का साथ दिया था. लेकिन ईरान ने लालच के चलते गैस फील्ड का एक बड़ा हिस्सा अन्य देशों की कंपनियों को दे दिया और भारतीय कंपनियों के लिए केवल थोड़ा सा हिस्सा छोड़ा. जिसके बाद इजराइल ने भारत का साथ देते हुए ईरान को झटका दिया और अपने यहाँ तेल व् गैस की फील्ड भारत को दे दी.

 

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