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आखिर कार गुलाम बना ही लिया चीन : पाकिस्तान को गुलाम बनाने की तैयारी में चीन ,भारत समेत पूरी दुनिया

आतंकवाद के जिस चाइना मॉडयूल से पाकिस्तान कश्मीर को तबाह करने के सपने देखता है। उसे उसका सबसे पक्का दोस्त सबसे बड़ा धोखा दे सकता है। ऐसा धोखा जिससे पूरा पाकिस्तान चीन का गुलाम बन जाएगा। ये ख़बर पाकिस्तान की आवाम और पाकिस्तान के हुक्मरानों के लिए है। जिस चीन की दोस्ती पर वो इतना इतरा रहा है। वो चीन उसका दोस्त नहीं दुश्मन है। एक ऐसा दुश्मन, जो दोस्ती की आड़ में पाकिस्तान को गुलाम बनाने की फिराक में है। हमारी इस विशेष रिपोर्ट से आप भी समझिए चीन के मंसूबे और पाकिस्तान की भूल को..

चीन की ये साजिश इस वक्त पाकिस्तान को समझ नहीं आएगी, क्योंकि वो भारत के विरोध में अंधा हो चुका है। इतना अंधा कि उसे चीन की चालाकी नजर नहीं आ रही है। उसके आतंक के आका बस इसी में खुश हैं, कि चीन पाकिस्तान में चल रही आतंकी फैक्ट्री चलाने में उसका साथ दे रहा है। पाकिस्तान की फौज बस इसी में मस्त है, कि चीन कश्मीर मामले में उसका साथ दे रहा है, लेकिन ये खुशी ज्यादा दिन नहीं चलने वाली है। क्योंकि जल्द ही पाकिस्तान का, ये चीन के प्रति अंधा प्रेम उसे ले डूबेगा, और जब उसे होश आएगा, तब तक पाकिस्तान चीन का गुलाम बन गया होगा।

दरअसल चीन पाकिस्तान में चाइना पाक-इकॉनमिक यानी (CPEC) के तहत एक कॉरिडोर बनाने जा रहा है। जिसमें चीन करीब 46 अरब डॉलर का निवेश कर रहा है। पाकिस्तान इसे अपनी और चीन की मजबूत दोस्ती की इबादत के रूप में देख रहा है, लेकिन ये पाकिस्तान का सिर्फ भ्रम है, अगर पाकिस्तान CPEC कॉरिडोर के जरिए अपनी अर्थव्यवस्था में बड़े बदलाव की उम्मीद पाले बैठा है, क्योंकि सीपीईसी एक ऐसा प्रॉजेक्ट है, जो पाकिस्तान की माली हालत और सामाजिक संरचना में उथल-पुथल मचा देगा, क्योंकि CPEC का 15 साल का जो मास्टर प्लान सामने आया है, उसकी मौजूदा शर्तों के मुताबिक पाकिस्तान पूरी तरह से चीन के रहमोकरम पर निर्भर हो जाएगा।

इस मास्टर प्लान की एक के मुताबिक सीपीईसी के जरिए पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के अधिकतर सेक्टरों और वहां के समाज में चीनी कंपनियों और चीनी संस्कृति की बड़े पैमाने पर पैठ हो जाएगी। मास्टर प्लान के तहत, पाकिस्तान में हजारों एकड़ कृषि भूमि चीन की कंपनियों को लीज पर दी है। वे वहां बीज की किस्मों से लेकर सिंचाई परियोजना तक के बारे में ‘डीमॉन्सट्रेशन प्रॉजेक्ट्स’ बनाएंगी। इस प्लान का मुख्य जोर खेती पर है, इससे पाकिस्तान पश्चिमी चीन की कृषि उपज के लिए एक बड़ा बाजार तो बन जाएगा। लेकिन इसका पाकिस्तान के लोकल उत्पादकों पर बुरा असर पड़ेगा। बीज, उर्वरक, कर्ज और कीटनाशक मुहैया कराने के अलावा चीनी कंपनियां अपने खेत भी बनाएंगी और फलों-सब्जियों और अनाज के लिए प्रोसेसिंग यूनिट बनाएंगी, और पाकिस्तान हाथ मलता रह जाएगा।

इसके अलावा इस प्रोजेक्ट के तहत पेशावर से लेकर कराची तक के शहरों में निगरानी का एक सिस्टम बनाया जाएगा। सड़कों और व्यस्त बाजारों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिन-रात वीडियो रिकॉर्डिंग का सिस्टम होगा। इसके अलावा पाकिस्तान में एक नेशनल फाइबर ऑप्टिक सिस्टम बनाया जाएगा, इसका इस्तेमाल न केवल पाकिस्तान में इंटरनेट ट्रैफिक के लिए, बल्कि टीवी ब्रॉडकास्टिंग में किया जाएगा। यह सिस्टम ‘चीन की संस्कृति के प्रचार-प्रसार’ के लिए चीनी मीडिया से सहयोग करेगा। इसके साथ ही चीन की कंपनियों के पाकिस्तान में पहले ही बन चुके बाजार को और मजबूत करने की योजना है, या यूं कहे कि ये पाकिस्तान को गुलाम बनाने का मास्टरप्लान है।

 

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