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जब भारतीय मेजर ने ख़ुद अपना पैर काटा और फिर बाद में पाकिस्तानी डॉक्टर ने….

भारतीय सेना ने इतिहास के बारे में बात की जाए तो ना जाने ऐसी कितनी कहानी हैं जिन्हें सुनने मात्र से आपको अपनी सेना पर गर्व होगा. आज हम आपको एक ऐसी ही मेजर की कहानी बताने वाले हैं जिसे पढ़कर आपको भारतीय सेना पर बेहद गर्व महसूस होगा. कहानी शुरू होती है उन दिनों से जब मेजर कार्डोज़ो ने सामरिक रूप से महत्वपूर्ण सिलहट की लड़ाई में भाग लिया था. उनको हेलिकॉप्टर से चारों ओर चल रही गोलियों के बीच युद्धस्थल पर उतारा गया था. इसके बाद जब वः गश्त लगा रहे थे तो उनका पैर एक सुरंग पर पड़ा और इसके बाद जो हुआ वो आज भी इतिहास में काले अक्षरों में दर्ज है. मेजर कार्डोज़ो ने खुद एक इंटरव्यू में बताया था कि वो उस समय मैं वेलिंगटन स्टॉफ़ कॉलेज में कोर्स कर रहे थे और उन्हें हुक्म मिला कि आप अपने घर-परिवार को छोड़कर सीधे पलटन में पहुँचिए.

आगे उन्होंने बताया कि “जब मैं दिल्ली पहुँचा, तो पता चला कि लड़ाई शुरू हो गई है. पालम पहुँचे, तो पता चला कि विमान कैंसिल हो गए हैं, इसलिए मुझे भागकर नई दिल्ली स्टेशन पहुँचना पड़ा.यहाँ पहुँचे तो पता चला कि असम मेल निकल गई है. दौड़कर गाड़ी की चेनपुलिंग करके हम ट्रेन में बैठे. असम पहुँचकर हमें पता चला कि सिलहट पर क़ब्ज़े की लड़ाई चल रही है.हम धर्मनगर पहुँचे और जीप में बैठकर एक जगह खलौरा पहुँचे. वहाँ हम हेलिकॉप्टर के इंतज़ार में थे. हम देख रहे थे कि कई हेलिकॉप्टर में बड़ी संख्या में भारतीय जवान घायल होकर पहुँच रहे थे.हम हेलिकॉप्टर से जब वहाँ पहुँचें, तो देखा कि भारी गोलाबारी चल रही थी. मोर्टार से, तोपखाने से गोले दाग़े जा रहे थे. वहाँ भयंकर लड़ाई चल रही थी. काफ़ी जवान घायल हो रहे थे और मारे जा रहे थे. साथ ही हम अपने दुश्मन को भी नुक़सान पहुँचा रहे थे.”

बाद में पाकिस्तान ने आत्मसमर्पण किया और मेजर वापिस लौट रहे थे लेकिन इस बीच एक ऐसी घटना हुई जिसने उन्हें हिला दिया. दरअसल बीएसएफ़ के एक प्लाटून कमांडर को शक़ था कि ख़तरा अब भी बना हुआ है. तो मेजर ने कहा मैं जाकर उन्हें समझाऊँगा….लेकिन जाते समय बारूदी सुरंग में मैं फँस गया और मेरा एक पैर उड़ गया. इसके बाद उनके साथ उन्हें वहां से ले    गये. इसके बाद मेजर बताते हैं कि उन्होंने अपने गुरखा साथी से बोला कि खुखरी लाकर पैर काट लो, लेकिन वो इसके लिए तैयार नहीं हुआ. फिर उन्होंने खुखरी मांगकर ख़ुद अपना पैर काट लिया. उस कटे पैर को वहीं गड़वा दिया. उनके सीओ साब ने  बताया कि पाकिस्तान का एक डॉक्टर है जो आपकी मदद कर सकता है लेकिन मेजर ने मना कर दिया.

 

मेजर ने अस्पताल जाने के लिए कहा लेकिन उस समय वहां कोई हेलेकोप्टर नहीं था तो आख़िरकार उन्होंने पाकिस्तानी  मेजर मोहम्मद बशीर  से ऑपरेशन कराया और वो काफी  सफल रहा. भारतीय सेना के इतिहास में यह

बात कहीं खो गयी थी लेकिन अब वक्त है इन वीरों को उनका समान लौटने की, शेयर करके यह जानकारी सभी को दें

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