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907 सालों तक लगातार अप्सरा के साथ संबंध बनाता रहा ये ऋषि, कारण ही कुछ ऐसा था

कामवासना एक ऐसी भावना है जिसपर शायद ही कोई विजय पा सका है।

पुराणों में कई ऐसे ऋषियों की कहानियाँ मिलती हैं जो संसार की मोह-माया त्यागकर दिव्यता को प्राप्त कर चुके थे लेकिन अचानक किसी सुन्दर स्त्री या अप्सरा को देख कामेच्छा को नियंत्रित नहीं कर पाए।

उनकी इसी कमी का लाभ उठाकर देवराज इंद्र ने कई बार ऋषियों को छला है। इन्द्र जब भी किसी समस्या से घिर जाते तो नैतिकता पूर्वक उसका समाधान ढूंढने की बजाय छल और कपट का सहारा लेते। उनके इस अनैतिक कार्य में अक्सर अप्सराओं की खूबसूरती काम आती थी।

खूबसूरती अपने-आप में एक छलावा होती है और इन्द्र के पास तो कई ऐसी अप्सराएं थी जो बला की खूबसूरत थीं। उन अप्सराओं के मोहजाल में फंसने से कई महान योगी भी खुद को नहीं रोक पाए। यह कहानी भी एक ऐसे ही ऋषि की है जिनके लिए समय ही रुक गया और वह भी एक-दो साल नहीं, बल्कि लगभग एक हजार साल।

कथा के अनुसार एक बार ऋषियों में श्रेष्ठ ऋषि कंडु गोमती नदी के किनारे घोर तपस्या कर रहे थे। देवराज इन्द्र को ऐसे समय हमेशा डर सताता था कि कहीं कोई अपनी तपस्या से वरदान पाकर उसे इंद्रलोक से पतित ना कर दे। इसी डर से ऋषि कंडु की तपस्या को भंग करने के लिए इंद्र ने अत्यंत सुंदर अप्सरा प्रम्लोचा को भेजा।

प्रम्लोचा बला की खूबसूरत थी। उसकी उस खूबसूरती को देख ऋषि अपनी वर्षों की कड़ी तपस्या भूल गये और उसके साथ गृहस्थ जीवन बसाने के सपने देखने लगे। वे उसकी खूबसूरती में इतना खो गये उन्हें ना तो समय का ध्यान था और ना ही पूजा-पाठ या ध्यान का।

कार्य पूरा हो जाने पर प्रम्लोचा स्वर्ग जाने के लिए बैचैन होने लगी पर ऋषि उसके मोह में इस कदर उलझे कि उसे खुद से कहीं भी दूर नहीं जाने देते। उनके खिलाफ जाकर अप्सरा ऋषि को नाराज भी नहीं करना चाहती थी। उसे भय था कि ऋषि कहीं उसे श्राप ना दे दें।

अचानक एक दिन ऋषि को एहसास हुआ कि उन्होंने आज पूजा नहीं की है। वे अपनी कुटिया से निकल कर बोले मैं पूजा करने के लिए जा रहा हूं। इस बात पर अाश्चर्यचकित होकर प्रम्लोचा बोली, “इतने सालों में आज आपको अचानक पूजा-पाठ का ध्यान कैसे आया। इतने दिनों से तो आप गृहस्थ आश्रम जी रहे थे।”

ऋषि अपनी स्थिति से अंजान होते हुए बोले, “तुम तो आज सुबह से ही मेरे साथ हो। फिर मैंने कब पूजा-पाठ छोड़ा।” उनका यह जबाव सुनकर प्रम्लोचा आश्चर्य से भर गई। उसने ऋषि को बताया कि वह आज सुबह से नहीं बल्कि पिछले 907 सालों से उनके साथ संबंध बना रही है।

ऋषि असंमजस में पड़ गये। वो अप्सरा के मोह में इस कदर फंस गये थे कि उन्हें समय के बीत जाने का एहसास ही नहीं हुआ। वास्तविक स्थिति का भान कराने के लिए प्रम्लोचा ने उन्हें इंद्र की योजना के बारे में सबकुछ सच बता दिया।

सारी बातें सुन ऋषि खुद को धिक्कारने लगे। जिस मोह-माया को त्यागकर उन्होंने कठोर तपस्या की थी, उसी मोह ने उनके कई वर्षों को नष्ट कर दिया और उन्हें इस बात का एहसास भी नहीं था। वास्तविकता पता लगने पर ऋषि ने फिर से कठोर तपस्या आरंभ कर दी।

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