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अभी अभी सबसे बड़ी खबर : हो गया भारत पाक में युध ,12 हजार फीट की ऊंचाई से पैराशूट लगाकर कूदे सेना और भारतीय कमांडों, एक और सर्जिकल स्ट्राइक- पाक में दहशत !

जैसलमेर : पीएम मोदी के आदेश पर भारतीय सेना ने आतंकी हमले के जवाब में पिछले साल पीओके में घुस के पाकिस्तानी आतंकियों और उनकी रक्षा करने वाले पाक सैनिकों की धज्जियां उड़ा दी थी. इस सर्जिकल स्ट्राइक की चर्चा दुनियाभर में हुई थी, जिसमे भारतीय सेना ने सफलता पूर्वक आतंकी ठिकानें तबाह किये थे. अब ऐसी ही एक और बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की तैयारी भारतीय सेना के जवानों ने पाकिस्तान से सटी सीमा पर रेगिस्तान में की, जिसने पाक फ़ौज को चौंका दिया.

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रेत के धोरों को चीरते अर्जुन-भीष्म टैंक, गरजती तोपें, पैराशूट से उतरते कमांडों और ध्वनि से भी तेज रफ्तार से उड़ने वाले लड़ाकू विमानों का इस्तमाल करके दुश्मन के काल्पनिक ठिकाने नेस्तनाबूद कर दिए गए. सन्नाटे को चीरता जयघोष और 2 महीनों के लगातार प्रैक्टिस के बाद हमेशा विजयी रहने का संकल्प लिए सैनिकों का जोश दुश्मन को देख दुगुना हो रहा था.

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दरअसल यह नजारा था भारतीय सेना के ‘हमेशा विजयी’ युद्धाभ्यास का, जो पाकिस्तान से सटी सीमा पर रेगिस्तान में दक्षिणी कमान के चल रहा था. धोरों में दौड़ते टैंक और एयरक्राफ्ट से नीचे कूदते सैनिकों को देख खुद सेनाध्यक्ष बिपिन रावत भी यह कहने को मजबूर हो गए कि ‘द ग्रेट प्राउड ऑफ यू.’

बता दें कि थलसेना और वायुसेना के संयुक्त युद्धाभ्यास हमेशा विजयी का शुक्रवार को समापन हो गया. इसमें 40,000 से ज्यादा भारतीय जवानों ने भाग लिया था. थल सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत और लेफ्टिनेंट जनरल डीआर सोनी सहित वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की मौजूदगी में शूरवीरों ने अपना पराक्रम दिखाया.

इस युद्धाभ्यास में इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, एविएशन, स्पेशल फोर्सेज और वायुसेना का भी पूरे तालमेल के साथ प्रयोग किया गया. साथ ही इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर के तहत सैटेलाइट तथा यूएवी से दुश्मन के ठिकानों की तुरंत ही रियल टाइम फोटो मिलते ही, उस पर सटीक निशाने साधकर नेस्तनाबूद किया गया.

छह दिन चले सबसे बड़े युद्धाभ्यास हमेशा विजयी की पांच बड़ी खासियत

1. भारतीय सेना के इतिहास में पहली बार 12 हजार फीट की ऊंचाई से जिप्सी को पैराशूट के माध्यम से उतारा गया। एएन 32 एयरक्राफ्ट से एक जिप्सी व 8 पैराट्रूपर्स ड्राप किए गए। हमारे जांबाजों ने दुश्मन के इलाके में सर्जिकल स्ट्राइक करते हुए उनके ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया। भारतीय सेना व वायुसेना के संयुक्त युद्धाभ्यास हमेशा विजयी के दौरान हमारे जांबाजों ने अपनी ताकत का परिचय दिया।

2. यह पहला मौका था, जब वायुसेना के हेलिकॉप्टर से 12 हजार फीट की ऊंचाई से पैराशूट जिप्सी के साथ कमांडों को ड्रॉप किया गया। देखते ही देखते आसमान से ब्लू लैंड के जांबाज पैराशूट के माध्यम से एक जिप्सी व 8 पैराट्रूपर्स रेड लैंड पर उतरे। उनको कवर करने के लिए सेना का टी 90 टैंक व तीन गाड़ियों पर सवार जांबाजों ने इलाके को घेर लिया। कमांडों ने बताया कि दुश्मन के रेडार में आने से पहले सेना दुश्मन के इलाके पर कब्जा करने का साहस रखती है।

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3. करीब 2 माह तक रेगिस्तानी इलाके में भारतीय सेना के 40 हजार सैनिकों ने 200 टैंकों व 25 एयरक्राफ्ट के साथ रण कौशल दिखाया। इस दौरान बारीकी से निगरानी, तेज नेटवर्किंग, सेना व वायुसेना के बीच तालमेल, दुश्मन पर हमला करते वक्त दो टीमों के बीच तालमेल, सूचना लेकर निर्णय लेना आदि पहलुओं पर जोर दिया गया। मुख्य रूप से टी 90 भीष्म टैंक व अर्जुन मार्क प्रथम ने इस युद्धाभ्यास में कौशल दिखाया।

4. युद्धाभ्यास के दौरान गुरुवार की शाम एक साथ 600 जवानों की पूरी बटालियन को ड्राप करने का परीक्षण किया गया। इसमें 23 एयरक्राफ्ट ने हिस्सा लिया। इसमें 600 जवान सवार थे। बटालियन के सदस्य एक के बाद एक नीचे उतरे और दुश्मन के इलाके पर कब्जा कर लिया। इसमें सी 17, सी 130 व हरक्यूलस सहित कई विमान शामिल हुए। 40 हजार जांबाजों ने पराक्रम से पाक को परास्त कर दिया।

5.युद्धाभ्यास में सबसे अहम अपनी क्षमता का मूल्यांकन करना था। इसी क्रम में एन 32 एयरक्राफ्ट से हमारे सैनिक केवल 850 फीट से ड्रॉप हुए, ताकि दुश्मन का राडार उन्हें पकड़ न सके। इन पैराट्रूपर्स ने विमान से कूदते ही पैराशूट खोल दिए और एक मिनट के भीतर जमीन पर लैंड कर गए। दुश्मन कुछ समझ पाए उससे पहले ही इन जांबाजों ने जमीन पर लैंड करके अपनी कार्रवाई को अंजाम दे दिया।

 

 

 

 

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