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आरुषि हत्याकांड: वो 7 चौंकाने वाली बातें जिसे पढ़ेंगे तो इस हत्याकांड की जांच करने वाली CBI से भरोसा उठ जाएगा

16 मई 2008 को नॉएडा के जलवायु विहार में हुए एक हत्याकांड में पूरे भारत को हिला दिया था, ज्ञात हो एक घर में 14 साल की आरुषि का शव मिला था. अगले दिन घर में काम करने वाले हेमराज का शव घर की छत पर मिला. सीबीआई जांच के बाद भी अभी तक यह साफ़ नहीं हुआ है कि आरोपी कौन था लेकिन सीबीआई जांच खुद ही कई सवालों के घेरे में है.

आपको याद होगा कि कैसे शुरुआत में ही यूपी पुलिस ने इस केस को सुलझाने का दावा किया था, उन्होंने राजेश तलवार को दोषी मानते हुएआया था कि  राजेश तलवार ने कथित तौर पर आरुषि और हेमराज को आपत्तिजनक स्थिति में देखा और गुस्से में दोनों की हत्या कर दी. इसके बाद भी यह साबित नहीं हुआ कि सच में खून किसने किया और आख़िरकार 2013 में  मामला   सीबीआई के पास पहुँच   गया.  अब जब मामला देश की सबसे बड़ी इन्वेस्टीगेशन टीम पर था तो लगा केस सुलझ जायेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

पत्रकार  अविरुक सेन ने आरुषि के नाम से एक किताब लिखी और उसमें कई ऐसे सवाल उठाये जिन्होंने सीबीआई तक को हिला दिया, उनके सवाल वाकई वाजिब हैं जिनका जवाब अभी तक नहीं मिल सका है. आज हम आपको ऐसी ही 7 सवालों के बारे में बताने वाले हैं जिन्होंने सीबीआई जांच को भी कटघेरे में ला खड़ा किया है.

1. किताब के मुताबिक़, सीबीआई ने घटनास्थल पर जो नमूने इकट्ठा किए और प्रयोगशाला भेजे, उनके साथ कथित तौर पर छेड़खानी की गई. 

किताब में सेन ने दावा किया है कि घटनास्थल पर रखे सामान के साथ छेड़-छाड़ की गयी है उन्होंने यह भी कहा है कि हैदराबाद की सेंटर फ़ॉर डीएनए फ़िंगरप्रिंटिंग एंड डायग्नॉस्टिक लैब की रिपोर्ट में कहा गया था कि हेमराज का खून तलवार दंपति के घर से कुछ दूर स्थित कृष्णा के बिस्तर पर मिला, लेकिन जांचकर्ताओं ने इसका संज्ञान नहीं लिया.

2. पत्रकार अविरुक के मुताबिक़, अगर रिपोर्ट को ध्यान से पढ़ा गया होता तो तलवार दंपति के उस कथन को मज़बूती मिलती कि घर में कोई बाहरी व्यक्ति दाखिल हुआ.  

अविरुक कहते हैं कि सीबीआई के एक अफ़सर धनकर ने 2008 में प्रयोगशाला को पत्र लिखकर कहा कि हेमराज का तकिया और उसका खोल, जिस पर खून लगा था, वो आरुषि के कमरे से मिले थे.उधर सीबीआई ने इसके उलट सुप्रीम कोर्ट के सामने, इलाहाबाद हाईकोर्ट के सामने, अपनी क्लोज़र रिपोर्ट में भी ये कहा कि ये सामान हेमराज के कमरे से मिला.लेकिन मुक़दमे के दौरान सीबीआई की अदालत में दिए गए बयान को नज़रअंदाज़ करते हुए सीबीआई अफ़सर धनकर की ‘ग़लत’ चिट्ठी पर भरोसा दिखाया गया.

3.किताब के मुताबिक़, सीबीआई का कहना था कि आरुषि की हत्या राजेश तलवार ने एक गोल्फ़ स्टिक से की जिसे कथित तौर पर बाद में अच्छे से साफ़ किया गया, लेकिन मुकदमे में अभियोजन पक्ष ने एक दूसरी गोल्फ़ स्टिक को पेश किया. 

सवालों के बीच एक अहम सवाल ये भी था कि आखिर तलवार दम्पति अभियोजन पक्ष मुकदमे के दौरान दो गोल्फ़ स्टिक कैसे पेश कर सकता है. अविरुक के अनुसार, सरकारी वकील की ओर से दलील दी गई कि आरुषि का गला स्कैल्पल या डेंटिस्ट द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली छुरी से काटा गया. जांच का विषय यह भी  था कि क्या वाकई एक  स्कैल्पल से हत्या की जा सकती है ?

4. किताब के अनुसार, तलवार दंपति से संपर्क के लिए, उन्हें दफ़्तर बुलाने के लिए, जानकारी हासिल करने के लिए सीबीआई द्वारा hemraj.jalvayuvihar@gmail.com आईडी का इस्तेमाल करना केस को लेकर शुरुआत से ही अफ़सरों की सोच पर सवाल खड़े करता है. 

पत्रकार सेन का कहना है कि इसी ईमेल के इस्तेमाल से सभी जानकारी प्रदान की गयी जो की गलत है, सरकारी ईमेल का इस्तेमाल क्यों नहीं हुआ ?

 

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5. किताब के मुताबिक़, तलवार दंपति के घर में काम करने वाली भारती मंडल का बयान भी कई सवाल खड़े करता है. दस्तावेज़ों के मुताबिक़, भारती ने अदालत में कहा कि उन्हें जो समझाया गया वो वही बयान दे रही हैं. 

 

कामवाली भारती ने जो बयान दिया वो अपने आप में ही एक पहली थी क्योंकि पहले उन्होंने कहा के उन्होंने दरवाजे को हाथ लगाया था लेकिन बाद में बोली सिर्फ बेल बजाई थी, सवाल ये है कि अगर घर अंदर से बंद था तो तलवार दंपत्ति के सिवा घर में कोई और नहीं था.

6. अगर आरुषि ने दरवाज़ा नहीं खोला तो क्या आरुषि के कमरे में मुख्य दरवाज़े के अलावा किसी और दरवाज़े से भी दाखिल हुआ जा सकता था?

किताब के अनुसार, आरुषि के कमरे में दाखिल होने का एक और रास्ता हो सकता था जिस पर जांचकर्ताओं को ध्यान देना चाहिए था.आरुषि के कमरे से पहले एक गेस्ट टॉयलेट पड़ता है जो कि आरुषि के टॉयलेट की ओर खुलता था.दोनों टॉयलेट के बीच में एक दरवाज़ा था जिसे गेस्ट टॉयलेट की ओर से खोला जा सकता था.

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7. किताब के अनुसार, सीबीआई ने उन गवाहों को पेश नहीं किया जिनकी गवाही तलवार दंपति के पक्ष को मज़बूत कर सकती थी. 

सेन ने सवाल उठाया था कि 141 गवाहों की सूची बनाई, लेकिन मात्र 39 गवाहों को अदालत में पेश किया गया. इनमें कई गवाह ऐसे थे जिनका  बयान बेहद अहम था. डॉक्टर चौधरी का बयान भी नहीं लिया गया क्योंकि वो बेहद अहम था.

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सवाल कई हैं लेकिन जवाब अभी तक नहीं मिल सका है, कोर्ट ने तलवार दंपत्ति को भी बरी कर दिया है तो इसका मतलब दोषी कोई और ही है जिसका पता लगाने में अभी तक सीबीआई नाकाम है. केस सुलझते-सुलझते और भी उलझ गया है.

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