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आरुषि हत्याकाण्ड के चार बड़े कारण जिसकी वजह से बरी हुए तलवार दम्पत्ति

आरुषि-हेमराज हत्याकांड में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तलवार दंपत्ति को बरी कर दिया है इसके साथ ही हाईकोर्ट ने तुरंत नूपुर तलवार और राजेश तलवार को जेल से रिहा करने का निर्देश दिया है. हाईकोर्ट ने कहा है कि जांच में कई खामियां है और ऐसे मामले में सुप्रीम कोर्ट भी इतनी कठोर सजा नही देता है . उन्हें गाजियाबाद की सीबीआई कोर्ट ने इस हत्याकांड का दोषी करार देते हुए दोनों को उम्रकैद सुनाई थी. इसके बाद उनके वकीलों ने निचली अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. आइये हम आपको कुछ ऐसे तथ्य बताते हैं जिनकी वजह से तलावर दम्पती को बरी किया गया.

इंडियन एक्सप्रेस को दिए गये इंटरव्यू में बचाव पक्ष के वकील तनवीर अहमद ने बताया  था कि उन्होंने ने ट्रायल के दौराल चार मुद्दों पर कोर्ट का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की थी लेकिन कोर्ट ने इन मुद्दों पर ध्यान नही दिया था. इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर इलाहाबाद कोर्ट ने तलवार दम्पत्ति को रिहा किया है. बचाव पक्ष के वकील ने अदालत को निम्न तर्क दिए थे-

साक्ष्यों का बोझ: बचाव पक्ष के वकील ने हाईकोर्ट में दलील दी थी कि जांच करने वालों ने साक्ष्यों का बोझ आरोपियों पर डाल दिया क्योंकि उन्होंने मान लिया था कि घर में चार लोग थे जिनमें से 2 की हत्या हो गयी तो बचे 2 ही गुनहगार हैं.बचाव पक्ष ने हिमाचल प्रदेश के राम बनाम हिमाचल सरकार का उदाहरण दिया.

 

नौकरानी की दलील: अपना पक्ष रखते हुए बचाव पक्ष ने कहा कि तलवार की नौकरानी भारती मंडल को सीबीआई ने गलत बयान देने के लिए दबाव डाला था. भारती के कोर्ट में दिए गए बयान के अनुसार जब 16 मई की सुबह वो तलवार के घर पहुंची थी तो दरवाज़ा अंदर से बंद था. सीबीआई के लिए ये बयान कई मायनों में महत्वपूर्ण था क्योंकि उसे साबित करना था कि तलवार दम्पति ने अंदर ही अपनी बेटी का खून किया और इस दौरान बाहर से कोई नहीं आया लेकिन बाद में ट्रायल के दौरान भारती ने स्वीकार किया था कि उसे गलत बयान देने के लिए सीबीआई ने कहा था.

घटना की कड़ी: जानकारी के लिए बता दें कि बचाव पक्ष ने जिस तरह से घटना की कड़ियों को पेश किया था कहना गलत नहीं होगा कि उससे घटना की सच्चाई और आरोपियों को संदेह का लाभ मिला क्योंकि सीबीआई ने सभी सबूत आरोपियों पर डाल दिए थे इससे कहीं ना कहीं यह साबित नहीं हो पाया कि इस मर्डर में किसी बाहरी शख्स का हाथ है भी या नहीं.
सबूत में छेड़खानी: सीबीआई ने निचली अदालत के सामने जो भी सबूत पेश किए थे कैसे की हेमराज के खून का डीएनए सैंपल वो आरुषि के कमरे से उसके तकिए पर से लिया गया था लेकिन ट्रायल के दौरान फॉरेन्सिक लैबोरेटरी के डॉक्टर बी के महापात्रा ने इस बात से पलटते हुए साफ़ कहा था कि हेमराज के खून के निशान आरुषि के कमरे से नहीं बल्कि हेमराज के कमरे से लिए गए थे. यकीनन बचाव पक्ष ने इस तरह के कई और सबूतों और तथ्यों में पाई गई गड़बड़ियों के सबूत कोर्ट को सौंपा था जिसके बाद खुद हाईकोर्ट ने भी माना कि ये तथ्य और सबूत तलवार दंपत्ति को उन्ही की बेटी की हत्या के दोषी ठहराने के लिए काफी नहीं है

 

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