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आप त्यौहार में व्यस्त हैं,वहां मौलानाओं ने लिया मोदी से पंगा, सोता रहा कोर्ट और मानवाधिकार आयोग

नई दिल्ली : मुस्लिम महिलाएं इतने सालों से तीन तलाक और हलाला जैसे कुरीतियों से प्रताड़ित होती रहीं थी तब तक किसी ने उनके हक़ की बात नहीं करी और ना ही किसी मानवाधिकार संगठन के मुँह से कभी कुछ फूटा. मोदी सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण की बात करती है और तीन तलाक से आज़ादी दिलवाती है लेकिन कुछ मौलवी पीएम मोदी की राह में रोड़ा अटकाते ही रहते हैं. तो वहीँ अभी दिवाली के त्यौहार पर कुछ धर्मनिरपेक्षता की अच्छी तसवीरें देखने को मिली लेकिन इन धर्म के ठेकेदारों से वह भी देखा नहीं गया.

 

श्री राम की आरती करने वाली मुस्लिम महिलाओं पर टूटा कहर

अभी मिल रही खबर अनुसार सहारनपुर के देवबंद में वाराणसी के एक कार्यक्रम में मुस्लिम महिलाओं द्वारा भगवान श्रीराम की तस्वीर के सामने खड़े होकर आरती किए जाने के मामले में देवबंदी उलमा गुस्से से भड़क उठे हैं उन्होंने फतवा निकलते हुए कहा है कि वे महिलाएं अब मुसलमान नहीं रहीं. उलेमा ने दो टूक में कहा है कि इस्लाम में साफ़ कहा गया है कि कोई मुस्लिम महिला या पुरुष अगर अल्लाह के अलावा किसी और की पूजा या आरती करता है तो वह इस्लाम से निकाल दिया जाता है.

दरअसल दीपावली के अवसर पर वाराणसी में कुछ मुस्लिम महिलाओं द्वारा भगवान राम की आरती एवं तस्वीर के सामने दीये सजाकर पूजा किया. वाराणसी में एक संस्था द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में नाजनीन अंसारी समेत कुछ मुस्लिम महिलाओं ने उर्दू में रचित श्रीराम की आरती और हनुमान चालीसा का पाठ किया था. बस इससे एक धर्म खतरे में पड़ गया.

और धर्म के ठेकेदार तुरंत सामने आ गए हालाँकि आज तक आतंकवादी संगठन जो धर्म के नाम पर लोगों को काटते और मारते रहते हैं. इसी धर्म के नाम पर महिलाओं का शोषण करते रहते हैं. धर्म के नाम पर ही छाती पर बम बांधकर मस्जिदों को ही उड़ा रहे हैं इन्हे आज तक कभी इस्लाम से बाहर नहीं किया गया.

ना मानवाधिकार, ना सुप्रीम कोर्ट कोई नहीं दे रहा साथ

यही नहीं रोहिंग्या को मुद्दा बनाकर सात समुन्द्र दूर से मानवाधिकारों के पेट में दर्द उठने लगता है और वो भारत पर मानवाधिकारों का हनन का आरोप लगा देते हैं. लेकिन कभी ऐसे फ़तवाधारकों पर कभी जबरन धर्म परिवर्तन करने वालों पर उनसे कुछ बोला नहीं जाता. और हमारा सर्वोच्च न्यायलय जिसे दही हांड़ी, जलीकट्टू , दिवाली पर पटाखे पर फैसला सुनाने में चंद पल लगते हैं लेकिन इन फतवा धारकों के ऊपर आज तक एक भी फैसला सुनाने की कभी किसी जज में हिम्मत नहीं हुई.

देवबंदी उलेमा ने इस्लाम से महिलाओं को ख़ारिज करते हुए समाधान भी बता दिया है उन्होंने महिलाओं को अल्लाह से माफी मांग पुन: कलमा पढ़ इमान में दाखिल होने की हिदायत दी है. दारुल उलूम जकरिया के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती शरीफ खान ने शुक्रवार को प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस्लाम और शरीयत पूरी दुनिया के लिए एक है. शरीयत के अनुसार मुसलमान सिर्फ अल्लाह की इबादत कर सकते हैं, और उन्हें इसी की इजाजत दी गई है. अगर कोई उसको छोड़कर किसी अन्य देवी देवता की पूजा या आरती करना इस्लाम में हराम है.

इस खबर के सोशल मीडिया पर फैलते ही लोगों का गुस्सा एक बार फिर भड़क उठा उन्होंने कहा ये तो बहुत ही छोटी सोच है तो कुछ लोगों ने कहा कहाँ मर गया सुप्रीम कोर्ट कहाँ मर गए मानवाधिकार वाले और वो वामंपंथी पत्रकार.

अभी कुछ दिन पहले भी मुस्लिम महिलाओं के सोशल मीडिया पर महिलाओं के फोटो डालने, ब्यूटी पार्लर जाने और बाल कटवाने और आईज ब्रो बनवाने के खिलाफ भी फतवा जारी किया जा चुका है.

 

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